Sunday, 3 May 2015

हस्ती

मुझे ढूढना हो तो ढूढना  तुम अपनी ही परछाइ मे...
क्युकि जहा तुम बसते वही मेरी बस्ती है...

बेखौफ़

दर्द को कभी इतना दर्द ना हो की वो बेखौफ़ हो जाये...
मतलबी इतना  न होना किसी से की किसी की जिन्द्गी बेमतलब हो जाये...

Saturday, 2 May 2015

मुमकिन

मुमकिन नही हर दुआ कुबुल हो जाये...

मुमकिन है जो मुकम्मल न हो उसकी खल्लिश दिल मे ना रह पाये...

नाराजगी

नाराजगी उनसे जताइ जाये जिनसे दिल्लगि की है...

अपनो से तो मर के भी रिश्ता बना रहता है...

कभी उनसे नाम जुडा होता तो कभी किस्सा उनमे छुपा होता है...

दोस्ती

प्यार और दोस्ती  दोनो ही जुदा जुदा है...

प्यार मे इंसान तन्हाइ ढूढता है...

दोस्ती मे इंसान तन्हा होके भी महफ़िल की जान होता है...

कुछ पल

कुछ पल के साथी फिर  कुछ उनकी यादें...

कुछ पल मे खोना पाना ...

और संग बित गये कितने ही लम्हे...

बेह्तरिन

बेह्तरिन लम्हे बेह्तरिन तरिके जीने के लिये काफ़ी है...

बेह्तरिन लोग और बेह्तरिन तजुर्बे जीना सिखाने के लिये बहुत है..