कुछ कश्ती की हस्ती ही कुछ ऐसी जहा से लिखी जाती वही स्याहि खतम हो जाती...
मुकद्दर ऐसी जहा से बनाइ जाती वही बारिश आती और बहा ले जाती
No comments:
Post a Comment